लाता है त्योहार यह , खुशियां खूब अपार।
महंगाई की मार से , मध्यम वर्ग लाचार।
दीवाली की रौनकें, दिल में भरतीं प्यार।
खुशियाँ हैं धनवान घर, निर्धन हैं लाचार।
-आकिब जावेद
"सपने वो नहीं जो नींद में देंखें,सपने वो हैं जो आपको नींद न आने दें - ए० पी०जे०अब्दुल कलाम "
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3 टिप्पणियाँ
सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय जी
हटाएंबहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय जी💐💐💐
जवाब देंहटाएंआपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
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