दीवाली दोहा

लाता है त्योहार यह , खुशियां खूब  अपार।
महंगाई  की मार से , मध्यम  वर्ग  लाचार।

दीवाली की रौनकें, दिल  में  भरतीं प्यार।
खुशियाँ हैं धनवान घर, निर्धन हैं लाचार।

-आकिब जावेद

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