कटते वन
बढ़ते जाते जन
है उपवन
कृत्रिम पौधें
वर्षा होती कृत्रिम
पर्यावरण
है धुँआ धुँआ
काला आसमान है
बदरी छाई
असंतुलन
अनेक बीमारी है
पर्यावरण
-आकिब जावेद
#haiku #PoetryForNature
#WorldEnvironmentDay #पर्यावरण_दिवस
"सपने वो नहीं जो नींद में देंखें,सपने वो हैं जो आपको नींद न आने दें - ए० पी०जे०अब्दुल कलाम "
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2 टिप्पणियाँ
बहुत सुन्दर।
जवाब देंहटाएंपर्यावरण दिवस की बधाई हो।
सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंआपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
“आवाज़ सुखन ए अदब” परिवार में आपका स्वागत और सहयोग हमारे लिए प्रेरणा है।
आपका साथ ही साहित्यिक यात्रा को और सुंदर बनाता है।
इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹