विश्व हिंदी दिवस

चुभती है चुभन
दिल में है तपन
कुछ तो है लग्न
तभी तो है मग्न
मन को समझाओ
अब ना करो जतन
हिंदी है हम वतन।।

-आकिब जावेद

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ