वो ठण्ड

मौसम ने अपना मिजाज बदल लिया,
क्या तुमने भी खुद को बदल लिया!
वो ठण्ड राते!
याद हैं ना तुम्हे!
तुम्हारी वो तेज चलती गर्म सांसे
युही नही चल रही थी।
कोई तो वजह थी,
ऐसे बेवजह तो नही थी!
खुद को खुद में समाना,
इतना आसान तो नही था!
चलो छोडो!
तुम्हे तो कुछ याद नही,
देखो समय भी बदल गया!
वो समय कोई और था,
वो ठण्ड कोई और थी!

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ