वो गरीब जो थी!

उस माँ को बच्चे की फ़िक्र थी,
जो कल रात बीमार था!
ना थे पैसे, ना थी दवा,
और करती भी क्या,
वो गरीब जो थी!
दिन भर मजदूरी करती,
थक हार के घर को जाती,
अपने लाल को देखकर रोती,
और करती भी क्या,
वो गरीब जो थी!
थर्राता शरीर अपने लाल का देखकर,
फफक फफक कर खूब रोती,
और करती भी क्या,
वो गरीब जो थी!
गयी बाजार वो जब दवाई लेने
दूकानदार ने डपट कर भगा दिया,
पैसे थे नही,कैसे दवाई लाती वँहा से,
और करती भी क्या,
वो गरीब जो थी!
माँ थी वो ममत्व तड़प रहा था,
आँचल से बाहर निकल रहा था!
लाल को जैसे देखती सब्र खो देती,
सामने मरते देख,खून के आँसू रोती,
और करती भी क्या,
वो गरीब जो थी!
किसी ने उसकी मदद ना कि,
सब बनते थे धन्ना सेठ इधर,
वो तड़प तड़प के मर रहा था,
संवेदनाये यंहा सबकी मर गयी थी!
वो रो रो कर प्रभु को याद कर रही थी,
और करती भी क्या,
वो गरीब जो थी!!

-आकिब जावेद

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