नौकरी तेरे प्यार में,दिल हो गया है बेचारा !
सैलरी के इंतजार में,दिन हो गया है "गिनतारा" !
"कलरव" करते हुए आती थी खुशियाँ ,
पर रहता है शांत नजारा !
" रैनबो " सी थी रंगीन जिन्दगी,
पर अभी छाया है अँधियारा !
" हमारा परिवेश " था , प्यार और त्योहार भरा,
पर जीवन की जरूरतों ने , बना दिया ,सुनसान सा नजारा !
बहुत "परख"थी जिन्दगी जीने की,
पर मुश्किल हालातों ने , बना दिया इसे खटारा
प्राइमरी तेरे प्यार में,हर मास्टर हो गया है बेचारा!
तेरे संग जिन्दगी बिताने के सिवा,अब ना रहा कोई चारा !
इसके नीति-नियम और व्यवस्था से, हर कोई है हारा !
फिलहाल बदहाल सी जिंदगी में, ओ सैलरी तेरा है सहारा !
एक प्राइमरी का मास्टर का है यह ब्यौरा! 😊🙏🏻
- आकिब जावेद
🙏🏻 ✍🏻 🙏🏻

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