है आरज़ू दिल-ए-उन्वान में कोई
जुस्तुजू सी कोई दिल में छुपी है
नही पता अब खुद की खैरियत का
दुसरो से उनकी तबियत का पता लेने लगे हो
समंदर सी एक लहर बह रही कोई
मन का हाल अब छुपाने लगे हो
पहले तो ना थे तुम कुछ इस तरह
अब अपना ऐसा हाल कंयू बनाने लगे हो
खुदा के सिवा ना चाहा था किसी को
अब तुम खूब मुश्कुराने लगे हो
बना के यु काफिर छोड़ा है ऐसे
हमको यु बेवकूफ बनाने लगे हो
मुश्कुराहट पे उसके भूल सब जाते
ख्यालो में ही बाते अब बनाने लगे हो
बहुत भोला तू भी है 'आकिब'
लेकिन उनकी शरारत को अब
पहचानने लगे हो।।
-आकिब जावेद

0 टिप्पणियाँ
Thanks For Visit My Blog.