लेख

सीबीआई ने मानकों की अनदेखी पर काली सूची में डाले गए लखनऊ के एक मेडिकल कालेज का केस रफा दफा कराने के मामले में हाइकोर्ट के एक जज समेत छह लोगो को गिरिफ्तार किये जाने का मामला सामने आया है।
इस केस में एक पूर्व जज का भी नाम आया है।जिसमे जज समेत बाकी लोगों को चार दिन के न्याययिक हिरासत में भेज दिया गया है, लेकिन इस तरह का मामला सामने आना न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
क्या जज भी इस तरह कृत्य कर सकता है, जिसमे किसी को फायदा पहुचाने के लिए न्याय को ही टाल दिया जाये या आपरोछ रूप से किसी को लाभ दिया गया हो।
इस केस की सीबीआई जांच की जानी है।और तभी पता चलेगा कि क्या हकीकत है?
अब लोगो को न्यायिक प्रक्रिया से विश्वास ना उठें इसलिए न्यायसंगत जांच होनी चाइए।जिससे न्यायपालिका से लोगो का विश्वास ना उठे।

आकिब जावेद,बिसँडा

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