क्या कहु तुम्हे

कैसे कह दू क्या नही हो तुम

ख्वाब हो आँखों का,सुकुन हो दिल का,

करार हो धड़कन का,सोच हो दिमाग का

आखिर क्या क्या कहु तम्हे,

सब कुछ तो तुम ही हो।।

आकिब जावेद

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