वरिष्ठ साहित्यकार/बाल साहित्यकार समीक्षक राजकुमार जैन राजन जी द्वारा बाल काव्य संग्रह हाथी को भी चित कर देती कविता संग्रह की समीक्षा की गई

बिसंडा (बांदा) उत्तरप्रदेश निवासी आकिब जावेद सम्भवनाओं से युक्त रचनाकार है। इनके पहले बाल कविता संकलन 'हाथी को भी चित कर देती' की मेरे द्वारा की गई समीक्षा आज इंदौर से प्रकाशित दैनिक 'इंदौर समाचार'10/10/26) एवं साप्ताहिक 'जनमत नज़र' (12/10/26) अंक में प्रकाशित हुई है। आपकी प्रतिक्रिया उत्साहवर्धन करेगी।
समीक्षा का मूलपाठ दिया है- 
पुस्तक समीक्षा- 
 बच्चों की प्यारी कविताएं : ‘हाथी को भी चित कर देती’
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पुस्तक - ‘हाथी को भी चित कर देती’ (बाल कविताएं)
रचनाकार - आकिब जावेद, बिसंडा (बांदा)
संपर्क - 9506824464
प्रकाशक - संपर्क प्रकाशन, हनुमानगढ़ संगम(राजस्थान)
प्रथम संस्करण- 2025          मूल्य - 150/- रुपये
समीक्षक - राजकुमार जैन राजन, आकोला 
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       बालसाहित्य बड़ों से भिन्न एक सृजन रूप है जिसको रचना बड़ा कठिन व जिम्मेदारी वाला कार्य होता है।बाल साहित्य की उपयोगिता हर कालखंड में रही है।लेकिन आज के तकनीकी युग में इसकी उपयोगिता बढ़ गई हैं। वर्तमान समय में हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या बालको का किताबों के पठन- पठन में अरुचि है। इंटरनेट और मोबाइल फ़ोन पर आश्रितता न केवल पठन-शक्ति को क्षीण कर रही है अपितु वैचारिक क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। ऐसे समय में भी मनोवैज्ञानिक रूप से बालक उन रचनाओं को पसंद करता है, जिसमें उसे अपना प्रतिबिंब दिखाई दे। बालक कोई भी हो, बाल कविताओं से जल्दी घुल-मिल जाता है और उसमें छिपी सीख को आत्मसात भी कर लेता है। कविताएं बालक जल्दी याद भी कर लेता हैं और वक्त- बेवक्त वह उन्हें गाता- गुनगुनाना भी रहती है।बालसाहित्य के विद्वान लेखक पॉल बेज़ार्ड कहते हैं कि, ‘पुस्तकें वही अच्छी होती है जो बच्चों को बाह्य ज्ञान ही नहीं बल्कि अंतर्ज्ञान भी दे सकें, एक ऐसा सरल सौंदर्य दे सकें जिसे वे सरलता से ग्रहण कर सकें और बच्चों की आत्मा में ऐसी भावना का संचार कर सकें जो उसके जीवन में चिरस्थाई बन जाये…।’ आज बालकों के लिए प्रचुर मात्रा में बाल कविताओं का सृजन किया जा रहा है पर कुछ ही रचनाकार हैं जो  बालमनोविज्ञान के अनुकूल लिखने में सफल हो पा रहे हैं। ऐसे में साहित्यजगत में तेजी से प्रतिष्ठा अर्जित करते युवा रचनाकार व शिक्षक श्री आकिब जावेद का बाल कविताओं का संकलन ‘हाथी को भी चित कर देती’ आशा जगाता है। 
            बिसंडा (बांदा) उत्तरप्रदेश निवासी आकिब जावेद की रचनाएं देश-विदेश की पत्र-पत्रिकाओं में सम्मान के साथ प्रकाशित होती रहती हैं। इनका एक ग़ज़ल संग्रह ‘ख़्वाबों के दरम्यां’ व दो कविता संग्रह ‘कोरे अक्षर’ एवं ‘नज़र’ को पाठकों का भरपूर सम्मान प्राप्त हुआ है। हाल ही आपका बाल कविता संग्रह ‘हाथी को भी चित कर देती’ प्रकाशित हुआ है। आपको विभिन्न साहित्यक सम्मानों से भी समादृत किया जा चुका है। 
          पेशे से आप शिक्षक हैं और अनवरत बच्चों के बीच रहने से बालमनोविज्ञान पर आपकी अच्छी पकड़ हैं। यही कारण है कि बच्चों के लिए लिखी इनकी रचनाएं सरल, सरस, सहज, बोधगम्य व मनोरंजक भी होती हैं। सद्य प्रकाशित बाल कविता संग्रह ‘हाथी को भी चित्त कर देती’ आपका पहला बाल कविता संग्रह है जिनमें विनिन्न कलेवर की 42 कविताएं संग्रहित की गई हैं। बालमन को छूने और बालपाठकों के बीच पैठ बनाने में सक्षम ये कविताएं बालमनोविज्ञान की बखूबी समझ के साथ लिखी गई हैं। आकर्षक विषयवस्तु के साथ बाल मनोभावनाओं से जुड़ा कोई भी ऐसा विषय नहीं है जो इस संग्रह में शामिल नहीं है। बच्चों में जीवन निर्माण, चेतना, जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान का महत्व व यातायात नियमों की जानकारी, डिजिटल दुनिया, मेले, किताबें, स्वास्थ्य जागरूकता, बचपन, संस्कार, चरित्र, श्रम का महत्व, खेल, शिक्षा, जल से जीवन, जीव जंतुओं के प्रति अनुराग, एवं रिश्तों के सम्मान के साथ मनोरंजन भी हैं। 
       बच्चों को अपना परिवेश किस तरह गहराई से प्रभावित करता है इस पर रचनाकार आकिब जावेद ने खूब ध्यान दिया है। ‘सदाचार जीवन का गहना’ की ये पंक्तियां देखिए - 
‘शिष्ट आचरण होता अच्छा 
यही  रास्ता   सबसे  सच्चा 
दुराचरण   दुष्टों  को  भाता 
अपना  है  ईमान  से नाता।’ 
        संग्रह की कविताओं में केवल शिल्प और भाषा की सुंदरता का जादू ही नहीं है ; अपितु वे हर बाल कविता  में एक संदेश भी देते हैं। ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ कविता की मनोरम प्रस्तूति देखिए - 
‘दो  चूहे  दिल्ली  गए  घूमने 
इधर- उधर  वह  लगे  सूंघने 
घर   से   निकले   भूखे  पेट 
दिल्ली पहुंचने में हो गए लेट। 

होटल एक दिख गया सामने 
पहला   चूहा   लगा   भागने 
गाड़ी  ने  उसे  टक्कर  मारी 
उसकी निकलगई हेकड़ी सारी। 

दूसरा   चूहा   देख   घबराया 
डरता  घर  को  वापस आया 
सावधानी हटी,  दुर्घटना घटी 
चूहे को  यह समझ मे आया।
         आज विश्व में प्रदूषण सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है जिसके लिए हम पृथ्वीवासी ही जिम्मेदार हैं और हम अपनी चेतना द्वारा इस समस्या से निजात पा सकते हैं। ‘जंगल जीवन हमको देते’ एवं ‘पौधों का महत्व’ कविताएं बच्चों को पर्यावरण बचाने का संदेश देती सुंदर कविताएं है - 
‘स्कूल में शिक्षक ने समझाया 
पौधों  का   महत्व  बतलाया 
पौधे       होते     मंगलकारी 
पौधे   मानव   के   उपकारी। 
        संग्रह की शीर्षक कविता ’हाथी को भी चित कर देती’ बड़ी मनोरंजक कविता है। चींटी एक बेहद छोटा व नाजुक जीव होती है फिर भी उसकी हिम्मत, हौसले व आत्मबल के आगे भारी -भरकम हाथी से भी नहीं डरती और उसको चित कर देती है। देखिए-  
‘छोटी - सी है पर न डरती है 
कभी  नहीं   घबराती  चींटी  
हाथी को  भी चित कर देती  
हमको सीख सिखाती चींटी।’
           दवा कवि आकिब जावेद का ‘हाथी को भी चित कर देती’ बाल कविता संग्रह इसलिये भी महत्वपूर्ण है की यह मात्र एक बाल काव्य संकलन ही नहीं है; अपितु इसे बाल मनोविज्ञान की किताब के रूप में भी देखना जरूरी होगा। बाल मनोभावों से जुड़ा कोई भी विषय ऐसा नहीं है जो इस संग्रह में नहीं है। पुस्तक का आवरण इतना सुंदर है कि बच्चे देखते ही इसे पढ़ने के लिए लालायित हो जाएंगे। 
      अंत में आप सबसे एक छोटी सी गुजारिश है कि इस किताब को जरूर पढ़ें एवं अपने परिचित व आसपास के बच्चों को उपहार स्वरूप यह किताब प्रदान करें- बच्चों को बेहतरीन नागरिक बनाने के लिए। इस बाल कविता संग्रह का बाल साहित्य जगत में स्वागत व सम्मान होना चाहिए।  बेहतरीन बाल कविता संकलन के लिए भाई आकिब जावेद को अनन्त शुभकामनाएं एवं कोटिश: बधाई!
●समीक्षक- 
राजकुमार जैन राजन 
चित्रा प्रकाशन 
आकोला - 312205 (चित्तौड़गढ़)  राजस्थान 
मोबाइल : 9828219919 
ईमेल- rajkumarjainrajan@gmail.com

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