आज की शायरी - आकिब जावेद

दिल में अभी तल्ख़ी-ए-अय्याम बहुत है
लब पर मगर एहसास का पैग़ाम बहुत है

हम ख़ाक हुए फिर भी शिकस्ता न हुए हैं
इस दिल में अभी हौसला-ए-जाम बहुत है

डॉ.आकिब जावेद 

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