आज का मुक्तक/शायरी

मोहब्बत का दीपक जलाना पड़ेगा,
गले  से  सभी  को  लगाना पड़ेगा।
गिरानी पड़ेगी ये नफ़रत की दीवार,
हमें  साथ  रहकर  दिखाना पड़ेगा।

जो टूटे हुए दिल उन्हें जोड़कर अब,
नया  एक   रिश्ता  बनाना  पड़ेगा।
अगर चाहते  हैं अमन इस जहाँ में,
मुहब्बत से  दुनिया सजाना पड़ेगा।

डॉ.आकिब जावेद


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