अगर वक़्त करवट बदलने लगे तो,
रहो दूर, दुनिया मचलने लगे तो।
नज़र का निशाना है अपनी जगह पर,
मज़ा है कि ख़ंजर संभलने लगे तो।
कभी दोस्तों ने सजाई हो महफ़िल,
क़दम रोक लेना बहकने लगे तो।
सभी राज़ अपने क़रीबी ही जानें,
अगर एक रिश्ता पिघलने लगे तो।
जो दिखता है वैसा नहीं हर कोई है,
मिलाना नज़र, जब परखने लगे तो।
डॉ.आकिब जावेद
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