डायरी के पन्नों से : पहलगाम
11.06.26
पहलगाम की ओर हमारी यात्रा समय पर शुरू हो गई थी, लेकिन अनंतनाग पहुंचते ही वाहनों की लंबी कतारों ने हमारी रफ्तार थाम ली। पहाड़ों की गोद में बसे इस स्वर्ग तक पहुंचने की उत्सुकता जितनी बढ़ रही थी, जाम उतना ही धैर्य की परीक्षा ले रहा था।आखिरकार शाम ढलते-ढलते हम पहलगाम पहुंच सके। यहीं रात का ठिकाना भी तय था।
पहलगाम में घोड़ों की सवारी के लिए लगातार आग्रह करते लोगों के बीच हमने पैदल चलकर घाटी को महसूस करने का निर्णय लिया। हमारा मानना था कि किसी जगह की असली खूबसूरती उसके रास्तों पर कदम-दर-कदम चलने से ही समझी जा सकती है। इन दिनों पहलगाम में पर्यटकों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ रही है। जिस स्थान पर हाल ही में हमला हुआ था, वह अभी जांच एजेंसियों के नियंत्रण में है और पर्यटकों के लिए बंद रखा गया है।
हम सड़क के किनारे-किनारे चलते हुए बैसरन घाटी और पहलगाम की वादियों का आनंद लेते हुए चंदनवाड़ी तक पहुंच गए। चंदनवाड़ी का नाम हम सुनते आए थे,चूंकि यात्रा का प्रारंभ होने वाला है इस कारण चंदनवाड़ी एवं आरु वैली को बंद रखा गया है, क्योंकि यहीं से पवित्र अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ होता है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इसी मार्ग से हिमालय की कठिन चढ़ाइयों को पार करते हुए बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकलते हैं।
पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम दिखाई दे रहे थे। जगह-जगह तैनात सुरक्षाबल यात्रियों और पर्यटकों को सुरक्षा का भरोसा दे रहे थे। पहलगाम की शांत वादियों में यह सतर्कता समय की आवश्यकता भी महसूस होती है।
शाम कब रात में बदल गई, इसका अहसास ही नहीं हुआ। ठंडी हवाएं, बादलों से घिरा आसमान और देवदार के वृक्षों से आती भीनी खुशबू वातावरण को और भी मोहक बना रही थी। हम रात लगभग आठ बजे तक घूमते रहे। पैरों में थकान थी, लेकिन मन अभी भी उन वादियों में ठहर जाना चाहता था।
अब बारी थी अपने ठिकाने लौटने की, पर पहलगाम की सड़कों पर जाम अभी भी बरकरार था। मात्र तीन किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग दो घंटे लग गए। पहाड़ों की यात्रा में समय का अपना अलग ही गणित होता है।
रात को हम सुंदर लिद्दर गांव पहुंचे, जहां हमारा छोटा-सा कॉटेज था। चारों ओर फैली शांति, पहाड़ों की नीरवता और ठंडी हवाओं का स्पर्श दिनभर की सारी थकान को पलभर में दूर कर रहा था। पास ही कल-कल बहती लिद्दर नदी अपनी मधुर ध्वनि से मानो प्रकृति का संगीत सुना रही थी। उस रात पहलगाम की वादियों ने हमें केवल दृश्य नहीं दिए, बल्कि ऐसी अनुभूतियां दीं जो लंबे समय तक स्मृतियों में जीवित रहने वाली थीं।
डॉ.आकिब जावेद
प्रस्तुत चित्र/वीडियो में आप सुंदरता रमणीक स्थल की देख सकते हैं ---
1 टिप्पणियाँ
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