बाल कविता - सूरज दादा

सूरज दादा

__________________________

सूरज दादा आग बरसाएँ,
गर्मी में सब पसीना पाएँ।
कौआ ढूंढे नया ठिकाना,
ठंडी छाया सबको भाए।

डॉ.आकिब जावेद 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ