कविता युद्ध की झुंझलाहट

युद्ध ने जन्मी झुंझलाहट,
जन-जन आज त्रस्त,
नेता डूबे मौज में,
बेखबर,निश्चिंत,मस्त।
विश्व भर में हलचल मची,
डगमग हर एक राह,
मंदी की आहट संग जगी,
स्थिरता की चाह।

आकिब जावेद


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2 टिप्पणियाँ

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