आज की शाइरी -- आकिब जावेद

सरे   बाजार  सौदा   हो    रहा  है
लहू  पानी  से  सस्ता हो  रहा  है।

बहुत    बढ़ने   लगी  बेरोजगारी
सियासत का करिश्मा  हो  रहा है।

हवा  चलने  लगी  है नफ़रतों की
तभी   इतना   ख़सारा  हो  रहा है।

-आकिब जावेद

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2 टिप्पणियाँ

  1. आपकी रचनाओं मेँ आपका परिवेश बोलता है।असरदार अभिव्यक्ति।
    वाचस्पति09450162925 वाराणसी.

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आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
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