घबराहट
हड़बड़ाहट
बेचैनी है
मयस्सर नही
सुकूँ उसे
जिसने देख के
भी किया अनदेखा
किसी के 
पैरों के छाले
किसी के 
मुह के 
निवाले!

#akib