अचानक फोन की घण्टी बजती है।वहाँ से आवाज आती है।
आप कौन?
अपना तआरुफ़ तो कराइए।
जी हम है बताइए क्या काम है।
उधर से- आप व्हाट्सएप्प बहुत चलाते है, आपने फलाने ग्रुप में क्या लिखा था?कुछ देर सोचने के उपरान्त
मैं- क्या लिखा हूँ ऐसा।।
मै तो कभी कुछ लिखता ही नही हूँ।
उधर से-आवाज आती है कि भाई तुम्हारे लिखने की वजह से मुझे समस्या हो गयी है।मुझे लोग परेशान करते है।तुम्हारे पास किसी का फोन आये तो मुझे नंबर देना मैं बात करूँगा उससे ठीक है।फोन रख देता है।दिल की धड़कन जोरो से चल रही है कि आखिर ऐसा क्या लिख दिया दिमाग को चारों तरफ दौड़ाया जा रहा है।जैसे बिजली के तारो में जोरदार करंट दौड़ता है वैसे ही दिमाग की नशों में जोरदार रक्त का प्रवाह हो चुका है।लेकिन जब कुछ लिखा हो कुछ किया हो तो याद आये।खैर इतनी देर तक ओखली में सर डाल देने के बाद भी कुछ भी हासिल नही हुआ।इतना सोच ही रहा था कि फोन की घण्टी  बजी।दिल की भी घण्टी बजी और उस बात को याद कर कर के दिल जोर जोर से धड़कने लगा।फोन तरफ देखा ही नही।ट्रूकॉलर में तो उसका भयंकर नाम दिखा रहा था।मैंने तुरंत उस व्यक्ति को फोन लगाया जिसने पहले मुझे काल की थी।उसने सब बताया कि वो कौन है।उसको मैंने तुरन्त नम्बर दिया और उसने उससे बात की।वो व्यक्ति जब सामने आया तो मेरा भोलापन देखिये की मैंने सब कुछ बता दिया उसे हालांकि वो तो किसी दाढी वाले को ढूंढ रहे थे।उसने जब कहा तुम हो तुम्हारी तो दाढी ही नही है।हालाँकि रखे हुए हो थोड़ा थोड़ा।कोई नही चलो सौदा कर लो वरना तुम्हारी खैर नही थी।।ओह्ह अचानक मम्मी ने जगा दिया मुझे।।पसीने से तर बतर की चलो सपना था लेकिन तब से यही सोच रहा हूँ कि दीं-ए-इस्लाम ने जो दाढी रखने का हुक्म दिया है अगर कोई दाढी रखे हुए है टोपी लगाये हुए है तो क्या उससे नफरत या दूसरे दर्जे का व्यवहार किया जाना उचित है?क्यों कि इन दिनों भीड़ द्वारा मुस्लिम लोगो को किसी न किसी बहाने से टारगेट किया जा रहा है।।
दिल ये भी सोच रहा था वैसे मेरा मुल्क🇮🇳अमन चैन पसंद करने वालो का है।आप सभी कभी भी ये सब नही सोचते और न ही सोचेंगे।दिल खुश है कि ये सपना था क्यों कि हकीकत में लोग हमसे बहुत प्यार करते है सम्मान करते है ।।ऐसा ही बना रहेगा मेरा मुल्क यही उम्मीद है एक शेर आप के बीच कि-

देश का  नाम  हमें  करना है।
साथ सबके ही हमें रहना है।।

है  मुहब्बत यूं हमें अब सबसे।
सब रहे मिलके यही सपना है।।

-आकिब जावेद