221--1221--1221--122
ये शुहरत इज़्ज़त कुछ नही क़िस्मत से ज़ियादा
दरख्वास्त तुम्हारी है ज़रूरत से ज़ियादा
मै बिक जाऊ ऐसे ये मुझे मंज़ूर नही
मै अनमोल हूँ अपनी क़ीमत से ज़ियादा
तवज़्ज़ो देते नही लोग यूँ अब तकब्बुर में
मै बदनाम हूँ अपनी शराफ़त से ज़ियादा
हर शख़्श मिला मुझे मेरा ही अब साया
वो मुझ जैसा ही मिला मेरी रंगत से ज़ियादा
मेरी तक़दीर करती है यूँ मुझसे ही रक़्स
तुझे कोई चाहता है इबादत से ज़ियादा
-आकिब जावेद
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