अब बता तुझे क्या क्या लिख दूँ?
सुबह लिख दूँ,कि शाम लिख दूँ!
दिल के हर कोने में तेरा नाम लिख दूँ,
क्या पानी में लिख दूँ,कि शायरी ही लिख दूँ!
अपनी गज़ल में तुझे,हर्फ़ हर्फ़ में लिख दूँ!
कोई तुझे पढ़े तो मुझे पाये,मैं कुछ ऐसा लिख दूँ!
जो कुछ भी रह गया था तेरे मेरे दरमियाँ,
उस दरमियाँ को भुला कर तुझे लिख दूँ!
क्या भूल हुई जो तुम भूल गयी,
उस भूल को क्या मैं भूल लिख दूँ?
आकिब'याद नही करता तुझे कोई,
फिर भी याद से कुछ याद को लिख दूँ!!
-आकिब जावेद

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