आज की शाइरी : अब ले रही है इम्तिहाँ ये जिंदगी

अब ले रही है इम्तिहाँ ये ज़िंदगी,
वो  हौसलों  से ही बढ़ाएगी मुझे।

اب لے رہی  ہے  امتحاں   یہ   زندگی,
وہ حوصلوں سے ہی بڑھائے گی مجھے !

है इल्म की दौलत जो मेंरे पास में,
ये  आसमाँ में  अब उड़ाएगी मुझे।

ہے علم کی دولت جو میرے پاس میں,
یہ   آسماں  میں اب اڑائے گی  مجھے !

सब साथ रहते है वतन के अपने हम,
कैसे  सियासत अब  डराएगी मुझे।

سب ساتھ رہتے ہیں وطن کے اپنے ہم,
کیسی سیاست اب ڈرائیں گی مجھے!

-आकिब जावेद© ( عاقب جاوید)



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