🍃🙏🌿
🍃नदी🍃
उतरी पर्वत के पीड़ा से
अंतर्मन में करती ध्वनि
पहुँची जाके मेरे मन में
मन में मेरे बह रही नदी
🍃जीवन🍃
सुख!दुःख
के डोर को
जीवन से
बाँध कर!
नित नई
ऊँचाई से
सफलता
प्राप्त कर!
-आकिब जावेद
स्वरचित/मौलिक
🍃🙏🌿
🍃नदी🍃
उतरी पर्वत के पीड़ा से
अंतर्मन में करती ध्वनि
पहुँची जाके मेरे मन में
मन में मेरे बह रही नदी
🍃जीवन🍃
सुख!दुःख
के डोर को
जीवन से
बाँध कर!
नित नई
ऊँचाई से
सफलता
प्राप्त कर!
-आकिब जावेद
स्वरचित/मौलिक
"सपने वो नहीं जो नींद में देंखें,सपने वो हैं जो आपको नींद न आने दें - ए० पी०जे०अब्दुल कलाम "
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आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और बहुमूल्य टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद।
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इसी तरह अपना प्रेम और मार्गदर्शन बनाए रखें। 🌹